Why do We Celebrate Ram Navami? राम नवमी क्यों मनाते हैं ?
Ram Navami सनातन हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई व धर्म की स्थापना और मर्यादा का एक सटीक प्रतीक है। राम नवमी, सनातन हिन्दू धर्म के प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई व धर्म की स्थापना और मर्यादा का एक सटीक प्रतीक है।
Ram Navami मनाने के मुख्य कारण और महत्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र नवमी को हुआ था। भगवान श्री विष्णु ने पृथ्वी से रावण जैसे दुष्ट राक्षस का अंत करने और धर्म की स्थापना करने के लिए श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। भगवान श्रीराम को आदर्श राजा और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता है। उनके जीवन से सीख लेने और सद्गुणों को अपनाने के लिए यह पर्व मनाया जाता है।
श्रीराम नाम की ज्योति से रोशन है हर एक धाम
मन में बस जाए जो, वही हैं मेरे प्रभु श्रीराम
जीवन की हर अंधेरी राह में जो दीप बन जाए
ऐसे दयालु, ऐसे करुणामय हैं मेरे श्रीराम …
इस Ram Navami पर्व पर प्रमुख रूप से क्या किया जाता हैं?
1. व्रत और दान करते हैं।
2. मंदिरों में पूजा और भजन करते हैं।
3. रामायण का पाठ करते हैं।
4.झांकियां और शोभायात्रा निकाली जाती है।

श्रीराम का नाम ही जीवन का आधार है
श्रीराम बिना ये संसार भी बेकार है
जिसके हृदय में बसते हैं श्रीराम
उसके जीवन में सदा सुख अपार है
सरल तरीके से Ram Navami की पूजा विधि
प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस पवित्र दिन पर लोग व्रत, पूजा और भक्ति करते हैं। पूजा करने की एक सामान्य विधि इस प्रकार है। प्रातः ब्रह्ममुहुर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर को साफ करके भगवान श्रीराम की मूर्ति या चित्र पर कुमकुम या पीले चन्दन से तिलक करें। पूजा की थाली में फूल, फल, दीपक, रोली, चावल, प्रसाद रखकर भगवान श्री राम की पूजा कर अराधना करें। इस दिन रामायण पाठ जरूर करें। इस दिन रामचरितमानस का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। दोपहर के समय में भी आरती जरूर करें। मान्यता है कि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए इस समय विशेष आरती और भजन भी किए जाते हैं। पूजा व आरती के बाद जरूरतमंदों को भोजन या कुछ भेंट अवश्य देवें। इससे आपके मन को एक असीम शांति का अनुभव होगा और आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि की बढ़ोतरी होती रहेगी।
Ram Navami पर्व पर भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी पाँच महत्वपूर्ण घटनाएँ
भगवान श्री महादेव के शिव धनुष को तोड़ना : राजा जनक ने अपनी बेटी सीता के स्वयंवर में एक शर्त रखी थी कि जो भगवान शिव के धनुष को उठाकर तोड़ देगा, उसी से सीता का विवाह होगा। प्रभु श्रीराम ने यह कठिन कार्य कर दिखाया और सीता से उनका विवाह हुआ।
14 साल का वनवास : राजा दशरथ की रानी कैकई के कहने पर प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का कठिन वनवास मिला। श्रीराम ने बिना इसका विरोध किए पिता की आज्ञा मान कर वनवास की ओर निकल पड़े।
सीता हरण : वनवास के दौरान लंका के राजा रावण ने छल से सीता का हरण कर लिया और उन्हें अपने साथ लंका ले गया।
श्री हनुमान जी की भक्ति : प्रभु श्रीराम के परम भक्त श्री हनुमान जी ने समुद्र पार करके लंका में माँ सीता का पता लगाया और प्रभु श्रीराम की सहायता की।
लंकापति रावण का वध : प्रभु श्रीराम ने भयंकर युद्ध में लंकापति रावण को हराया और धर्म की जीत हुई।
Ram Navami पर्व पर प्रभु श्रीराम के जीवन से मिलने वाली अनमोल सीख
सत्य का पालन : प्रभु श्रीराम हमेशा सच के रास्ते पर चले। इससे सीख मिलती है कि जीवन में सत्य ही सबसे बड़ा धर्म है।
माता-पिता का सम्मान : प्रभु श्रीराम ने अपने पिता की आज्ञा मानकर 14 साल का कठिन वनवास स्वीकार किया।
कर्तव्य निभाना : प्रभु श्रीराम ने हर परिस्थिति में अपना कर्तव्य निभाया, चाहे वह पुत्र का हो, पति का या राजा का।
भाईचारा : प्रभु श्रीराम, श्री लक्ष्मण व श्री भरत के बीच गहरा प्रेम और अतुलनीय सम्मान था।
आदर्श विवाह : प्रभु श्रीराम और सीता का विवाह; प्रेम, विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
मित्रता का महत्व : प्रभु श्रीराम ने श्री हनुमान जी और राजा सुग्रीव के साथ सच्ची मित्रता निभाई।
बुराई के खिलाफ संघर्ष : प्रभु श्रीराम ने राक्षसों के राजा रावण को युद्ध में हराकर बुराई पर अच्छाई की जीत हांसिल की।
धैर्य और संयम : कठिन परिस्थितियों में भी प्रभु श्रीराम ने धैर्य नहीं खोया।
न्यायप्रिय राजा : अयोध्या लौटकर प्रभु श्रीराम ने आदर्श शासन किया, जिसे ‘‘रामराज्य’’ कहा जाता है।
सभी के प्रति करुणा : प्रभु श्रीराम हर व्यक्ति के प्रति दयालु और न्यायपूर्ण थे।
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