Shree Shivashtak in Hindi

श्री शिवाष्टक Shree Shivashtak in Hindi

Shree Shivashtak in Hindi

श्री शिवाष्टकम् (Shree Shivashtakam) आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति और भगवान शिव की कृपा से समस्त कष्टों का निवारण होता है

श्री शिवाष्टक के जप से फायदें

मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति :
इसके नियमित और सच्चे मन से जाप से मन को शांति मिलती है, क्रोध, तनाव और चिंता कम होती है।
समृद्धि व आरोग्य :
इसके प्रभाव से धन-धान्य, अच्छे मित्रों और उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। साथ ही रोगों से मुक्ति पाने में भी सहायता मिलती है।
आध्यात्मिक विकास :
यह स्तोत्र साधक की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है और भगवान शिव के साथ उनके संबंध को गहरा बनाता है।
भय और बाधाओं का नाश :
नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव कम होता है और जीवन के मार्ग में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
मोक्ष की प्राप्ति :
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह स्तोत्र जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) दिलाने वाला माना गया है।

पाठ करने की विधि व समय :

  • सर्वोत्तम परिणाम के लिए इसका पाठ प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) में करना चाहिए।
  • विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन इसे पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Shree Shivashtak in Hindi
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शुद्ध हिंदी में श्री शिवाष्टक

जय शिवशंकर – जय गंगाधरकरुणा कर करतार हरे
जय कैलाशीजय अविनाशीसुखराशि सुख सार हरे
जय शशि शेखरजय डमरूधरजय जय प्रेमागार हरे
जय त्रिपुरारीजय मदहारीअमित अनन्त अपार हरे
निर्गुण जय जयसगुण अनामयनिराकार साकार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

जय रामेश्वरजय नागेश्वरवैद्यनाथ केदार हरे
मल्लिकार्जुन – श्री सोमनाथजय महाकाल ओंकार हरे
त्र्यम्बकेश्वरजय घुश्मेश्वरभीमेश्वर जगतार हरे
काशीपति श्री विश्वनाथ जयमंगलमय अघहार हरे
नीलकंठ जयभूतनाथ जयमृत्युंजय अविकार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

जय महेश जय जय भवेश जय आदिदेव महादेव विभु
किस मुख से हे गुणातीत प्रभुतव अपार गुण वर्णन हो
जय भवकारक तारक हारक – पातक दारक शिवशंभु
दीन दुःख हर सर्व सुखाकरप्रेम सुधाधर दया करो
पार लगा दो भव सागर से बनकर कर्णाधार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

जय मन भावन जय अति पावन – शोक नशावन शिवशंभु
विपद विदारन अधम उबारन – सत्य सनातन शिवशंभु
सहज वचन हर जलज नयनवर – धवल वरन तन शिवशंभु
मदन कदन कर पाप हरन हर – चरन मनन धन शिवशंभु
विवसन विश्वरूप प्रलयंकर जग के मूलाधार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

भोलानाथ कृपालु दयामय औढरदानी शिव योगी
सरल हृदय अतिकरुणा सागर – अकथ कहानी शिव योगी
निमिषमात्र में देते हैं नवनिधि मनमानी शिव योगी
भक्तों पर सर्वस्व लुटाकर बने मसानी शिव योगी
स्वयम्‌ अकिंचन जन मन रंजन – पर शिव परम उदार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

आशुतोष! इस मोहमयी निद्रा से मुझे जगा देना
विषम वेदना से विषयों की मायाधीश छुड़ा देना
रूप सुधा की एक बूँद से जीवन मुक्त बना देना
दिव्य ज्ञान भंडार युगल चरणों की लगन लगा देना
एक बार इस मन मंदिर में कीजै पद संचार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

दानी हो दो भिक्षा में अपनी अनपायनि भक्ति प्रभु
शक्तिमान हो दो अविचल निष्काम प्रेम की शक्ति प्रभु
त्यागी हो दो इस असार संसार से पूर्ण विरक्ति प्रभु
परमपिता हो, दो तुम अपने चरणों में अनुरक्ति प्रभु
स्वामी हो निज सेवक की सुन लेना करुण पुकार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

तुम बिन व्याकुल हूँ प्राणेश्वर आ जाओ भगवन्त हरे
चरण शरण की बाँह गहो हे उमारमण प्रियकन्त हरे
विरह व्यथित हूँदीन दुःखी हूँदीन दयालु अनन्त हरे
आओ तुम मेरे हो जाओ आ जाओ भगवंत हरे
मेरी इस दयनीय दशा पर कुछ तो करो विचार हरे
पार्वती पति हर-हर शंभु, पाहि पाहि दातार हरे॥
शिव पाहि पाहि दातार हरे॥

शिव समान दाता नहीं, विपद विदारण हार
लज्जा सबकी राखियो, नन्दी के असवार

॥ इति श्री शिवाष्टक स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥
Shree Shivashtak in Shuddh Hindi

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