कब्ज के कारण, लक्षण, घरेलू इलाज और परहेज (Home Remedies for Constipation)

कब्ज के कारण, लक्षण, घरेलू इलाज और परहेज (Home Remedies for Constipation)

कब्ज के कारण, लक्षण, घरेलू इलाज और परहेज (Home Remedies for Constipation)

कब्ज क्या है?

मल (Stool) जब कठोर हो जाए, शौच करने में कठिनाई हो, या सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग हो, तो इस स्थिति को कब्ज (Constipation) कॉन्स्टिपेशन कहा जाता है।

Causes of Constipation
Causes of Constipation

कब्ज होती क्यों है? (वैज्ञानिक दृष्टिकोण)

हमारी बड़ी आंत (Colon) भोजन से पानी को अवशोषित करती है। यदि मल लंबे समय तक बड़ी आंत में रुका रहता है तो, उसमें से अधिक पानी निकल जाता है और मल कठोर (Tight) हो जाता है, जिससे पेट में कब्ज की समस्या उत्पन्न होती है।

कब्ज के प्रमुख कारण

भोजन में फाइबर युक्त पदार्थ का अभाव

Lack of fiber-rich foods in the diet
Lack of fiber-rich foods in the diet

कब्ज का सबसे प्रमुख और सामान्य कारण भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर (रेशेदार पदार्थ) का अभाव होना है। फाइबर हमारे शरीर के पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मल में नमी बनाए रखता है, जिससे मल आसानी से बड़ी आंत से होकर बाहर निकल जाता है।

आजकल की व्यस्त जीवनशैली, जबान के चटोरेपन और फास्ट फूड की बढ़ती दीवानगी के कारण हम ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज का पर्याप्त सेवन नहीं कर पाते। आज के समय इसके स्थान पर हम जंक फूड, व मैदा से बने पदार्थ, तले हुए खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने लगे हैं, जिनमें फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है। परिणामस्वरूप मल कठोर होने लगता है और पेट में कब्ज की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

सेब, अमरूद, पपीता, नाशपाती, पालक, गाजर, दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस तथा साबुत अनाज/मिलेट्स जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसलिए स्वस्थ पाचन तंत्र और कब्ज से बचाव के लिए दैनिक आहार में पर्याप्त मात्रा में रेशेदार खाद्य पदार्थों को शामिल करना हम सभी के लिए अति आवश्यक है।

पर्याप्त पानी न पीना

Not drinking enough water
Not drinking enough water

शरीर को एकदम स्वस्थ बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना अत्यंत आवश्यक है। पानी पाचन तंत्र को सुचारु रूप से कार्य करने में सहायता करता है और मल को मुलायम बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो बड़ी आंत (कोलन) मल से अधिक मात्रा में पानी अवशोषित करने लगती है। इसके परिणामस्वरूप मल सूखकर कठोर हो जाता है, जिससे उसे बाहर निकालने में कठिनाई होती है और कब्ज की समस्या उत्पन्न हो सकती है। जो लोग दिनभर पर्याप्त पानी नहीं पीते, अधिक चाय-कॉफी का सेवन करते हैं या गर्म मौसम में शरीर में पानी की कमी होने देते हैं, उनमें कब्ज की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

शारीरिक गतिविधि की कमी

Lack of physical activity
Lack of physical activity

आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम न करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी भी कब्ज का एक प्रमुख कारण है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तब आंतों की मांसपेशियां भी सक्रिय रूप से कार्य करती हैं और भोजन को पाचन तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया, जिसे पेरिस्टाल्सिस (Peristalsis) कहा जाता है, सामान्य रूप से चलती रहती है।

इसके विपरीत, घंटों तक एक ही स्थान पर बैठकर काम करना, शारीरिक श्रम न करना या लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने से आंतों की गति धीमी पड़ सकती है। इससे मल बड़ी आंत में अधिक समय तक ठहरता है, जिसके कारण उसमें से पानी अधिक मात्रा में अवशोषित हो जाता है और मल कठोर होकर कब्ज का कारण बनता है।

नियमित रूप से पैदल चलना, योग करना, हल्का व्यायाम करना तथा सक्रिय जीवनशैली अपनाना पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और कब्ज की समस्या से बचने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

मल त्याग की इच्छा को बार-बार रोकना

Repeatedly suppressing the urge to defecate
Repeatedly suppressing the urge to defecate

अक्सर अनदेखा किया जाने वाला कारण मल त्याग की प्राकृतिक इच्छा को बार-बार रोकना है। सामान्यतः जब मल बड़ी आंत से होकर मलाशय (Rectum) में पहुंचता है, तब शरीर मस्तिष्क को संकेत देता है कि शौच जाने का समय हो गया है। यह एक प्राकृतिक कॉल (Natural Call) है, जो पाचन तंत्र के सामान्य कार्य का हिस्सा है। लेकिन कई लोग व्यस्त दिनचर्या, कार्यस्थल की व्यस्तता, यात्रा, सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग से संकोच या अन्य कारणों से इस प्राकृतिक इच्छा को बार-बार दबा देते हैं। ऐसा करने पर मल लंबे समय तक बड़ी आंत और मलाशय में रुका रहता है। इस दौरान बड़ी आंत मल से अधिक मात्रा में पानी अवशोषित कर लेती है, जिससे मल धीरे-धीरे सूखकर कठोर हो जाता है और उसे बाहर निकालना कठिन हो जाता है।

यदि लंबे समय तक यह आदत बनी रहे, तो शरीर का प्राकृतिक रिफ्लेक्स कमजोर पड़ने लगता है और धीरे-धीरे शौच की इच्छा कम महसूस होने लगती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति को पुरानी (Chronic) कब्ज की समस्या हो सकती है। इसलिए जैसे ही शौच की इच्छा महसूस हो, उसे अनदेखा करने के बजाय तुरंत मल त्याग करना चाहिए। इसके अलावा प्रतिदिन एक निश्चित समय पर शौच जाने की आदत डालनी चाहिये।

मानसिक तनाव और चिंता

Mental stress and anxiety
Mental stress and anxiety

आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद भी कब्ज का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। हमारे मस्तिष्क और पाचन तंत्र के बीच एक गहरा संबंध होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘‘गट-ब्रेन एक्सिस (Gut&Brain Axis)’’ कहा जाता है। यह संबंध मस्तिष्क और आंतों के बीच लगातार संदेशों का आदान-प्रदान करता है तथा पाचन क्रिया को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जब हम लंबे समय तक तनाव, चिंता, अत्यधिक काम के दबाव या मानसिक परेशानियों से गुजरते है, तो इसका सीधा प्रभाव हमारे गट-ब्रेन एक्सिस पर पड़ता है। परिणामस्वरूप आंतों की सामान्य गति (Peristalsis) धीमी पड़ सकती है, जिससे भोजन और मल बड़ी आंत में अधिक समय तक रुके रहते हैं। इससे कब्ज की समस्या उत्पन्न होती जाती है।

मानसिक तनाव को कम करने के लिए नियमित योग, ध्यान (Meditation), प्राणायाम, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और सकारात्मक जीवनशैली अपनाना लाभदायक माना जाता है। ‘‘पेट चुस्त तो हर रोग दुरूस्त’’ बिल्कुल सही कहावत है। जब हमारा पाचन तंत्र और पेट स्वस्थ (चुस्त) होता है, तो पूरा शरीर बीमारियों से दूर रहता है और ऊर्जा से भरपूर रहता है। पेट की अच्छी सेहत का राज संतुलित आहार और सही जीवनशैली में छिपा है।

अधिक दूध और प्रोसेस्ड फूड का सेवन

Consumption of excessive milk and processed foods
Consumption of excessive milk and processed foods

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में स्वाद और सुविधा के कारण लोग प्राकृतिक और पौष्टिक भोजन की अपेक्षा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने लगे हैं। परिणामस्वरूप पाचन तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और कब्ज, गैस तथा अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अत्यधिक मात्रा में दूध, डेयरी उत्पादों तथा प्रोसेस्ड और फास्ट फूड का अधिक सेवन भी कब्ज का मुख्य कारण माना जाता है। आधुनिक खान-पान में पिज्जा, बर्गर, मैदा से बने खाद्य पदार्थ, बिस्कुट, नमकीन, पैकेटबंद स्नैक्स और अन्य फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ा है। इन खाद्य पदार्थों में प्रायः फाइबर (रेशेदार पदार्थ) की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि इनमें वसा (थ्ंज), चीनी और परिष्कृत कार्बाेहाइड्रेट (त्मपिदमक ब्ंतइवीलकतंजमे) की मात्रा अधिक हो सकती है।

इसलिए स्वस्थ पाचन तंत्र बनाए रखने के लिए फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में या नहीं करना चाहिए तथा दैनिक आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दलिया, ओट्स और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। संतुलित और प्राकृतिक आहार न केवल कब्ज से बचाव में सहायक होता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

कब्ज मिटाने की अचूक दवा है त्रिफला चूर्ण

रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण को गरम पानी के साथ लें। 6 माह तक ऐसे करने से पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या भी ठीक हो जाती है। त्रिफला चूर्ण तीन आयुर्वेदिक औषधीय फलों ‘‘आंवला, हरड़ और बहेड़ा’’ का एक शक्तिशाली मिश्रण है। यह मुख्य रूप से पाचन में सुधार, कब्ज से राहत, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है।

आलूबुखारा से कब्ज में फायदे

आलूबुखारा जैसे फल का सेवन भी कब्ज की समस्या को दूर करने में उत्तम उपाय है क्योंकि आलूबुखारा लैक्सटिव होने के कारण कब्ज की समस्या में फायदेमंद होता है।

कब्ज के घरेलू इलाज

  1. कब्ज हो तब दो चम्मच गुड़ गर्म दूध के साथ में रात्रि में सोने से पहले लें।
  2. रात्रि में सोने से पहले दूध में सूखे अंजीर को उबाल कर खाएं, और दूध को पी लें।
  3. सुबह उठकर नींबू के रस में काला नमक मिलाकर सेवन करें।
  4. रात के भोजन में पपीता का सेवन खाएं।
  5. दस ग्राम इसबगोल की भूसी को सुबह-शाम पानी के साथ पिएं।

कब्ज के लक्षण

  1. कुंथन करने पर ही मलत्याग होना।
  2. पेट में दर्द एवं भारीपन रहना।
  3. पेट में गैस बनना।
  4. मल का सख्त (कठोर) एवं सूखा होना।
  5. सिर में दर्द रहना।
  6. बदहजमी
  7. बिना श्रम के ही आलस्य बने रहना।
  8. पिण्डिलियों में दर्द रहना।
  9. मुंह से दुर्गन्ध आना।
  10. कब्ज के कारण मुँह में छाले होना भी एक आम समस्या है।
  11. त्वचा में मुँहासे या फुंसियाँ होना।

डॉक्टर से कब सम्पर्क करें

आमतौर पर अनुचित खान-पान के कारण कभी न कभी हम सभी को कब्ज की समस्या हो सकती है, जो घरेलू उपचार या सही खान-पान से कुछ ही दिन में ठीक हो जाती है। यदि कब्ज लंबे समय तक चलती है, या घरेलू उपचार करने से भी कब्ज से राहत ना मिल रही हो, तो यह बवासीर का कारण बन सकती है। ऐसी अवस्था में तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करें।

FAQ

प्रश्न : कब्ज क्यों होती है?
उत्तर : मुख्य कारण फाइबर की कमी, कम पानी पीना, व्यायाम न करना और तनाव हैं।

प्रश्न : क्या रोज़ शौच न होना कब्ज है?
उत्तर : जरूरी नहीं। यदि मल त्याग कठिन हो या सप्ताह में तीन बार से कम हो, तो उसे कब्ज माना जा सकता है।

प्रश्न : क्या तनाव से कब्ज हो सकती है?
उत्तर : हाँ, तनाव आंतों की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

प्रश्न : क्या कम पानी पीने से कब्ज होती है?
उत्तर : हाँ, शरीर में पानी की कमी से मल कठोर हो जाता है।

प्रश्न : क्या कब्ज किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है?
उत्तर : कुछ मामलों में यह थायरॉइड, मधुमेह, बड़ी आंत की बीमारी का संकेत हो सकती है।

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